जंगल में आग लगाने वालों की खैर नहीं।
सूचना देने वाले को मिलेगा 5,000 का इनाम।
रुद्रप्रयाग। जनपद के रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के अंतर्गत दक्षिणी जखोली रेंज के जंगलों में धधकती आग ने वन विभाग और आमजन की चिंता बढ़ा दी है। मयाली क्षेत्र के आसपास असामाजिक तत्वों द्वारा द्वारा बार बार आग लगाने की प्रवृति बढ़ने से वनाग्नि की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) हरीश थपलियाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने घोषणा की है कि जंगलों में जानबूझकर आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों की सूचना देने वाले व्यक्ति को 5,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और यह इनाम योजना इस वर्ष के पूरे फायर सीजन तक प्रभावी रहेगी।
“भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 के तहत, वनों में आग लगाने पर सजा का प्रावधान है, इस धारा के मुताबिक, वनों में आग लगाने पर छह महीने तक की जेल होनी सुनिश्चित है, और जुर्माने के साथ-साथ नष्ट हुई वन संपदा का आर्थिक मूल्यांकन कर नुकसान के लिए भी प्रतिकर देना होगा।”
इस वर्ष मौसम के बदले मिजाज ने आग की घटनाओं को और हवा दी है। अमूमन जनवरी माह में होने वाली बारिश इस बार नदारद रही, जिससे जंगलों में गिरी चीड़ की पत्तियां (पिरुल) सूखकर 'बारूद' का काम कर रही हैं। हालांकि, बीते दिन श्रीकेदारनाथ धाम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम की पहली बर्फबारी हुई है, जिससे निचले इलाकों में भी बारिश की उम्मीद जगी है। बारिश न होने के कारण नवंबर-दिसंबर के सूखे ने जंगलों को संवेदनशील बना दिया है।
जंगलों से उठने वाले धुएं ने स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भीषण धुएं के कारण क्षेत्र में लोगों को खांसी, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग ने अपील की है कि जंगल की संपदा को बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। वनाग्नि न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि यह वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बड़ा खतरा बन गई है।


