हक की खातिर आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीण

2023 को आई आपदा ओर 26 जून 2025 को छेनागाड़ आपदा,
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छेनागाड़ आपदा के जख्म और सिस्टम की बेरुखी; हक की खातिर आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीण।

वायदों की 'आपदा' से उपजा जन-आक्रोश,बढ़ता जनसमर्थन: उग्र आंदोलन की चेतावनी।

रुद्रप्रयाग। पहाड़ की जवानी और पानी भले ही पहाड़ के काम न आती हो, लेकिन अब यहाँ के लोग अपने हक के लिए सिस्टम से टकराने को मजबूर हैं। जनपद के बड़ेथ बाजार में आज से शुरू हुआ आमरण अनशन शासन-प्रशासन की उस कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार है, जिसने आपदा की मार झेल रहे ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। अगस्त 2023 की विनाशकारी आपदा के बाद पुनर्निर्माण के नाम पर मिले 'खोखले आश्वासनों' ने आखिरकार क्षेत्रीय जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व प्रधान शिवानन्द नौटियाल का कहना है कि यह अनशन केवल मांगों की फेहरिस्त नहीं, बल्कि उस अनदेखी के खिलाफ विद्रोह है जो पिछले डेढ़ साल से जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि:

  • अधूरा पुनर्निर्माण: 2023 की आपदा के निशान आज भी गहरे हैं, लेकिन धरातल पर निर्माण कार्य ठप पड़े हैं।

  • कनेक्टिविटी का संकट: डिजिटल इंडिया के दौर में भी क्षेत्र मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

  • बदहाल सड़कें: बड़ेथ-जोला-उछोला मार्ग और चंदन गंगा पर पुल न होने से ग्रामीणों का जीवन दांव पर लगा है।

"हमने बार-बार प्रशासन की चौखट खटखटाई, लेकिन फाइलों Yके बोझ तले हमारी बुनियादी जरूरतें दबकर रह गईं। अब जब तक 10 सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, यह अनशन खत्म नहीं होगा।" — शिवानन्द नौटियाल, आंदोलनकारी

इस आंदोलन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भारी समर्थन मिल रहा है। अनशन स्थल पर जोला की ग्राम प्रधान दीपा देवी, तालजामण के प्रधान दीनानाथ और सामाजिक कार्यकर्ता रामचंद्र पंवार सहित दर्जनों ग्रामीणों की मौजूदगी ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अब आर-पार की है। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो इस लोकतांत्रिक संघर्ष को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।


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