शिक्षा विभाग में 3 साल से एक ही स्थान पर जमें अधिकारी और कार्मिकों का होगा स्थानांतरण।
लंबे समय से एक ही स्थान पर जमें हुए कार्मिकों का होगा स्थान्तरण उस सम्बन्ध में आदेश हुआ जारी।
शिक्षा विभाग उत्तराखंड के द्वारा विद्यालयों को किस स्तर तक मजबूत किया गया इसकी बानगी देखनी है तो बन्द होते स्कूल और गुरु के लिए आसमान ताकते शिष्य ओर छात्रों के परिजनों की गुहार से भरी खबरें नित्य प्रतिदिन देखने से स्पष्ट होता है।
शिक्षा में क्रांति की बातें करने वाले आखिर पायदान पर केंद्रीय शिक्षा विभाग के द्वारा जारी की गई पीजीआई की रिपोर्ट में 35 वें नम्बर पर अपना स्थान बना के शिक्षा के माध्यम से भारत के भविष्य का निर्माण कर रहा है।
उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग में सुगम दुर्गम के चक्कर में कितने मामले ओर खबरें सामने आती हैं यह देखने योग्य ओर विचारणीय मामला है। कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जो दो दशक से अपने गावँ के स्कूलों में जमे हुए हैं और उनके लिए न स्थान्तरण नीति है न कोई नियम न कानून क्या समझा जाये क्या ये खेला नही करते होंगे, दो दशक से अधिक समय तक अपने घर के पास कुण्डली मार कर बैठे शिक्षकों पर कभी शिक्षा विभाग की नजर क्यों नही पड़ी और नजर पड़ी तो आंखे क्यों फेर दी गयी।
आखिर इस बार शिक्षा विभाग के अफसरों की नींद इन आंकड़ों को देखकर खुलेगी या नही यह समय बताएगा।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि-
उपर्युक्त विषयक कृपया शासन के पत्र सं0- पत्र सं0- BES1- MISC/ 25.1 / 114 / 2022 XXIV -A-1 दिनांक 23-11-2022 के साथ संलग्न मा० मंत्री, विद्यालयी शिक्षा, उत्तराखण्ड सरकार के पत्रांक-4879 / मंत्री / VIP / उ०शि० / वि०शि० / 2022-23 दिनांक 16-11-2022 का संदर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें,
जिसके द्वारा विभागान्तर्गत लम्बे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों / कार्मिकों को अन्यत्र स्थानों पर तैनात किये जाने हेतु सुस्पष्ट प्रस्ताव / आख्या अविलम्ब शासन को उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये गये हैं।
अतः कृपया अपने अधीनस्थ कार्यालय / विद्यालयों में 03 वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों / कार्मिकों की सूचना निम्न प्रारूप पर तत्काल निदेशालय को उपलब्ध कराने का कष्ट करें।
हमने पहले भी शिक्षक बैठें हैं कुंडली मारकर अपने घर के पास सरकारें न जाने कितनी आयी पर इनकी सेटिंग हर सरकारों में चली शीर्षक से खबर चलाई थी ।
कार्मिक या अधिकारी एक ही जगह कुण्डली मार कर बैठे हैं उनकी सभी सरकारों में चली यदि नही चली तो 20 वर्ष से अधिक समय से एक ही स्कूल में कैसे कुण्डली मारकर बैठे हैं।
इन पर नजरें क्यों नही पड़ी और नजरें पड़ी तो फेरी क्यों गयी। स्पष्ट है कि नजराना पेश किया गया या इतनी बड़ी पहुंच है कि कोई नजरें इनकी तरफ उठा नही सकता।
पूर्व समय मे भी स्थान्तरण आदेश आये और गए जिनपर राजनीति और वोट बैंक कर चक्कर मे सरकार द्वारा लागू नहीं करवाया जा सका। इसकी बानगी देखनी है तो उदाहरण है आंकड़े निकाल के देखिएगा ऐसे कितने कार्मिक है जिनके पदोन्नति होने के बाद भी वह गए नही वही जमें रहे इसका कारण क्या हो सकता है।
शिक्षा मंत्री जी के संज्ञान में अभी परीक्षाफल बना रहे बच्चे और शिक्षक सेल्फी में व्यस्त की घटना को लाया गया था आगे यह न हो के लिए आवश्यक कदम उठाने होगें।


