डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल 17वें दिन भी जारी, उत्तराखंड क्रांति दल ने दिया समर्थन।
रुद्रप्रयाग। जनपद में अपनी 27 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत डिप्लोमा इंजीनियर्स का कार्य बहिष्कार बुधवार को 17वें दिन भी जारी रहा। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलना शुरू हो गया है। इसी क्रम में आज उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के पदाधिकारियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर इंजीनियरों की मांगों को जायज ठहराते हुए अपना पूर्ण समर्थन घोषित किया।
महासंघ के जनपद अध्यक्ष रेवत सिंह रावत और सचिव आलोक पुरोहित के नेतृत्व में इंजीनियरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारी इंजीनियरों की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगति दूर करना, ग्रेड-पे में सुधार, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, जल संस्थान व पेयजल निगम का राजकीयकरण एवं एकीकरण शामिल है। इसके साथ ही वे पदोन्नति में 20 प्रतिशत कोटा, सहायक अभियंताओं के अधिकार क्षेत्र में विस्तार, उचित बीमा सुविधा, लैपटॉप जैसे आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता और गैर-तकनीकी कार्यों में ड्यूटी लगाने जैसी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं।
धरना स्थल पर समर्थन देने पहुंचे उक्रांद के केन्द्रीय महामंत्री देवेन्द्र चमोली और जिलाध्यक्ष बलबीर चौधरी ने कहा कि इंजीनियरों की हड़ताल से विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि डिप्लोमा इंजीनियर्स की न्यायोचित मांगों का तत्काल निस्तारण किया जाना चाहिए। इस अवसर पर केन्द्रीय सचिव विष्णु कांत शुक्ला और संगठन मंत्री पृथ्वीपाल रावत सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इंजीनियरों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।


