श्री अन्न' से बदलेगी काश्तकारों की किस्मत

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM),
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कुनियाली गांव में मंडुवा बीज का निःशुल्क वितरण, 'श्री अन्न' से बदलेगी काश्तकारों की किस्मत

कृषि विभाग की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के अंतर्गत मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल 

रुद्रप्रयाग: जनपद के कृषि विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) के अंतर्गत मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। गुरुवार को न्यायपंचायत पाजना के कुनियाली गांव में 10 हेक्टेयर भूमि के लिए काश्तकारों को मंडुवा (रागी) का उन्नत बीज निःशुल्क उपलब्ध करवाया गया। इस मुहिम का उद्देश्य पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर किसानों की आय में वृद्धि करना और पहाड़ के मोटे अनाज को वैश्विक पहचान दिलाना है।

पहाड़ की कृषि में मंडुवा का विशेष स्थान रहा है, लेकिन लंबे समय से पुराने और पारंपरिक बीजों के उपयोग के कारण उत्पादन में भारी गिरावट देखी जा रही थी। अब तक प्रति हेक्टेयर उत्पादन मात्र 12 से 15 कुंतल तक सीमित रह गया था। इस समस्या के समाधान हेतु कृषि विभाग द्वारा विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित 'VL 379' प्रजाति का बीज वितरित किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस उन्नत प्रजाति की उत्पादन क्षमता प्रति हेक्टेयर 20 से 25 कुंतल है, जो पारंपरिक बीजों की तुलना में लगभग दोगुनी है।

किसानों में इस नई पहल को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। उत्साह का एक बड़ा कारण उत्तराखंड सरकार द्वारा मंडुवा का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लगभग 49 रुपये घोषित करना है। सरकार न केवल बेहतर मूल्य दे रही है, बल्कि स्थानीय सहकारी समितियों के माध्यम से खरीद की गारंटी भी प्रदान कर रही है, जिससे बिचौलियों का डर खत्म हो गया है।

 केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य चावल, गेहूं, दालों और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ाना है। इसके तहत आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और उर्वरकों का उपयोग कर कृषि उत्पादकता में सुधार लाया जाता है। यह मिशन न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि मृदा उर्वरता और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

इस अवसर पर कृषि विभाग के कर्मचारी श्री कुलदीप सिंह ने काश्तकारों को मंडुवा की फसल की बुवाई, वैज्ञानिक देखभाल और अधिक पैदावार लेने के गुर सिखाए। उन्होंने बताया कि 'श्री अन्न' (मोटा अनाज) न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि यह पहाड़ की कम पानी वाली भूमि के लिए भी सबसे अनुकूल फसल है।

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