अगस्त्यमुनि में आरएसएस की 'प्रमुख जन गोष्ठी' संपन्न, शताब्दी वर्ष पर संगठन शक्ति का दिया संदेश।
अगस्त्यमुनि। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मंदाकिनी कार्यालय के सेमिनार हॉल में 'नए क्षितिज, नए आयाम: विविध क्षेत्र समन्वित संवाद' विषय पर एक प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन की भूमिका और समाज जागरण पर गहन मंथन किया गया।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता भजन सिंह खत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संघ का 100वां वर्ष केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक सशक्त करने का अवसर है। उन्होंने संगठन की वैश्विक व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज 92 देशों में संघ की शाखाएं संचालित हो रही हैं, जबकि 132 देशों में विभिन्न माध्यमों से संघ की विचारधारा पहुँच चुकी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “शक्ति व्यक्ति में नहीं, बल्कि संगठन में निहित होती है।”
कार्यक्रम में जिला संघ चालक तेजपाल सिंह खत्री ने संघ दर्शन की बारीकियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि संघ की कार्यपद्धति को समर्पित होकर जुड़ने पर ही समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि 1925 की परिस्थितियों को देखते हुए डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। किसी भी संगठन की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता से पूर्व संगठन को तीन कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है: उपहास, उपेक्षा और व्यापक विरोध। प्रखर इच्छाशक्ति के बल पर इन चुनौतियों को पार करने के बाद ही ऐसा आयाम मिलता है, जिसे समाज सप्रेम स्वीकार करता है।
इस संवाद कार्यक्रम में शिक्षा, विधि, सैनिक प्रकोष्ठ, साहित्य एवं महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी समाजहित में सामूहिक प्रयासों पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्णानंद नौटियाल ने की। इस अवसर पर जिला कार्यवाह शैलेंद्र गौड़, जिला प्रचारक पंकज गड़िया, विद्या मंदिर प्रधानाचार्य प्रेम सिंह राणा सहित वीरांगना संगठन के कार्यकर्ता व जिला एवं नगर कार्यकारिणी के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया गया।





