उत्तराखंड में बड़ा सियासी उलटफेर: 'सत्ता की डगर' पर भाजपा को झटका।
कांग्रेस में शामिल हुए 6 दिग्गज चेहरे। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस कितनी होती मजबूत ये देखना होगा।
देहरादून/दिल्ली। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट अभी दूर है, लेकिन सत्ता के गलियारों में शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। 'राजनीति सत्ता के लिए क्या-क्या न करा दे' की कहावत शनिवार को उस वक्त चरितार्थ हुई, जब दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय (24 अकबर रोड) में भाजपा के छह बड़े दिग्गजों ने 'कमल' का साथ छोड़कर कांग्रेस का 'हाथ' थाम लिया। प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में हुए इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है।
कांग्रेस में शामिल होने वाले चेहरों में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, नारायण पाल, भीमलाल आर्य के साथ-साथ रुड़की के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष गौरव गोयल, मसूरी के पूर्व अध्यक्ष अनुज गुप्ता और लाखन सिंह नेगी जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले दिग्गजों का यह पाला बदलना केवल दल-बदल नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बदली हुई हवा का संकेत है। भाजपा के इन क्षत्रपों का कांग्रेस में जाना सत्ताधारी दल के लिए एक बड़े 'अलार्म' की तरह देखा जा रहा है।
कांग्रेस पार्टी ने इस जॉइनिंग को अपनी बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह तो केवल 'पहली खेप' है। प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा की नीतियों से अब खुद उनके नेता ही त्रस्त हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता का मोहभंग भाजपा से हो चुका है और ये नेता समझ चुके हैं कि 2027 में कांग्रेस की सरकार वापसी करने जा रही है। कांग्रेस खेमे में इस बदलाव से जबरदस्त उत्साह है, क्योंकि शामिल हुए नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों में खासा प्रभाव माना जाता है।
दूसरी ओर, इस बड़े उलटफेर ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड की राजनीति अब पूरी तरह से 'चुनावी मोड' में आ गई है। सत्ता की दौड़ में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नेताओं का एक दल से दूसरे दल में जाना यह दर्शाता है कि विचारधारा से ऊपर अब 'चुनावी गणित' हावी हो रहा है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों के पाला बदलने की चर्चाओं ने राज्य की राजनीति को बेहद दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।


