"आस्था या आबकारी? केदारघाटी की महिलाएं सरकार से पूछ रही- कब थमेगा शराब का अवैध कारोबार?
अवैध शराब के खिलाफ केदारघाटी की मातृशक्ति का हुंकार, फाटा में विशाल जन-आक्रोश रैली।
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी के ग्रामीण क्षेत्रों में पांव पसार रहे अवैध शराब के कारोबार के विरुद्ध अब मातृशक्ति ने मोर्चा खोल दिया है। फाटा क्षेत्र में महिला मंगल दलों के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। फाटा मुख्य बाजार से शुरू हुई यह जागरूकता रैली लगभग एक किलोमीटर दूर बैरंगना तक निकाली गई, जिसमें बडासू, जामू, खड़िया और धानी सहित कई गांवों की महिलाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। इस आंदोलन को स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों ने भी अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए खड़िया की क्षेत्र पंचायत सदस्य योगिता देवी ने कहा कि अवैध शराब का जाल समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि गांव-गांव तक शराब की पहुंच से आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो रही है। महिलाओं का कहना है कि पूर्व में सोनप्रयाग कोतवाली को ज्ञापन देने के बावजूद पुलिस प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे ग्रामीणों में गहरा रोष है। महिलाओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
आंदोलन में शामिल भैरव सेना के जिलाध्यक्ष अशोक सेमवाल ने तीर्थाटन की मर्यादा पर सवाल उठाते हुए कहा कि केदारनाथ यात्रा के प्रमुख पड़ावों जैसे तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि और काकड़ागाड़ में शराब की दुकानों का होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर शराब और मांस की दुकानों से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच रही है। ग्रामीण महिलाओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहाड़ को संभालने की जिम्मेदारी उठाने वाली 'आधी आबादी' आज शराब के कारण सबसे अधिक प्रताड़ित है। अब देखना यह होगा कि जनहित की दुहाई देने वाली सरकार जनता की इस मांग पर क्या कदम उठाती है।


