आपदा में बह गई लाइन, फिर भी थमाए बिल; रुद्रप्रयाग जल संस्थान के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा।
जखोली- कोठियाड़ा-पोणजोली क्षेत्र में जल संस्थान की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। पिछले नौ महीनों से पेयजल लाइन ठप होने के बावजूद विभाग द्वारा पानी के बिल भेजे जाने पर ग्रामीणों ने ग्रामसभा की बैठक में कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्र में पानी की बूंद तक नहीं पहुंची, तो विभाग किस आधार पर बिल वसूल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, विगत वर्ष 26 जून 2025 को आई भीषण आपदा के कारण कोठियाड़ा पोणजोली पेयजल लाइन का मुख्य स्रोत पूरी तरह बह गया था। इसके बाद से जल संस्थान रुद्रप्रयाग ने लाइन को सुचारू करने की जहमत नहीं उठाई। क्षेत्र पंचायत सदस्य शम्भू प्रसाद कोठारी, ग्राम प्रधान पवन राणा और लक्ष्मी देवी ने संयुक्त रूप से बताया कि विभाग से कई बार गुहार लगाने के बाद भी पाइपलाइन को ठीक नहीं किया गया।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि प्रथम चरण में सभी कनेक्शन जल संस्थान की पुरानी लाइन से थे। लेकिन 'हर घर नल, हर घर जल' योजना के द्वितीय चरण में जल निगम द्वारा बिछाई गई नई लाइन से सभी ग्रामीण संयोजनों को जोड़ दिया गया। इसके बाद जल संस्थान की पुरानी लाइन बिना कनेक्शन के रह गई और आपदा के बाद वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। बावजूद इसके, जल संस्थान द्वारा लगातार बिल भेजे जा रहे हैं, जिसे ग्रामीणों ने पूरी तरह अनुचित बताया है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जल संस्थान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग के फिटर द्वारा जल निगम की नई सुचारू लाइन के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे गांव की वर्तमान पेयजल व्यवस्था ठप्प होने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल संस्थान केवल अपनी क्षतिग्रस्त लाइन पर कार्य करे, नई लाइन के साथ किसी भी प्रकार की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, टैंक से पहले बरसिर गांव को मनमाने ढंग से दिए गए कनेक्शनों पर भी ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक पेयजल व्यवस्था सुचारू नहीं थी और लाइन टूटी पड़ी रही, उस अवधि का कोई भी ग्रामीण भुगतान नहीं करेगा। ग्रामीणों ने विभाग से जल्द से जल्द बिल निरस्त करने और नई लाइन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।


