उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला-बजट में 10% बढ़ोतरी को मंजूरी

उत्तराखंड कैबिनेट- बजट में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी को हरी झंडी,
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उत्तराखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: शिक्षा, कृषि और न्याय क्षेत्र में सुधारों की झड़ी; बजट में 10% बढ़ोतरी को मंजूरी

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और जनहित से जुड़े कई दूरगामी निर्णयों पर मुहर लगाई गई। आगामी बजट सत्र के मद्देनजर कैबिनेट ने इस बार के बजट में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी को हरी झंडी दी है, जिससे बजट का कुल आकार लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये होने की संभावना है। हालांकि, बजट के अंतिम स्वरूप और संशोधन के लिए कैबिनेट ने मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।

शिक्षा और शोध को नई ऊँचाई-

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने 'मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना' का दायरा बढ़ाते हुए अब इसमें 21 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों को भी शामिल कर लिया है। इसके साथ ही, 'स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड ई-पुस्तकालय योजना' को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत छात्र मामूली शुल्क (100 से 500 रुपये तक) देकर डिजिटल मोड में ई-बुक्स, शोध जर्नल्स और मैगजीन का लाभ उठा सकेंगे। वहीं, विद्यालयी शिक्षा में कार्यरत 4 विशेष शिक्षकों को नियमित नियुक्ति देने का भी मानवीय निर्णय लिया गया है।

कृषि और बागवानी में आत्मनिर्भरता की ओर कदम-

राज्य को फल और शहद उत्पादन में अग्रणी बनाने के लिए 'सेब की अत्याधुनिक नर्सरी विकास योजना-2026' और 'मौन पालन (मधुमक्खी पालन) नीति-2026' को मंजूरी दी गई है। सेब की हाई-डेंसिटी नर्सरी लगाने वाले आवेदकों को 40 से 50 प्रतिशत तक की राज सहायता दी जाएगी। मौन पालन नीति के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और उत्तराखंड के शहद को एक ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

न्याय प्रणाली और सुशासन में सुधार-

न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए कैबिनेट ने प्रदेश में 3 नए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSCs) की स्थापना को मंजूरी दी है, जो विकासनगर, काशीपुर और नैनीताल मुख्यालय में खुलेंगे। इसके साथ ही उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों के लिए 14 कोर्ट मैनेजरों के पद सृजित किए जाएंगे। व्यापार को सुगम बनाने के लिए 'उत्तराखंड जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026' और समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन विधेयक 2026 को आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की भी अनुमति दी गई है।

शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण-

राज्य के सभी 11 नगर निगमों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और प्रशासनिक सुधारों के लिए पर्यावरण इंजीनियरों और हाइड्रोलाजिस्ट के 11 पदों के सृजन को मंजूरी मिली है। साथ ही, 'उत्तराखंड उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग हेतु नीति 2026' को भी प्रख्यापित किया गया है, जो जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर और शारदा रिवर फ्रंट जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के प्रभावी संचालन हेतु विशेषज्ञों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।

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