वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

चीड़ के वृक्ष पहाड़ के लिए अभिशाप,
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 दावानल की चपेट में आए जंगल, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल।

पिरूल से आर्थिकी' और विद्युत उत्पादन जैसी विभागीय योजनाएं भी धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही।

 जखोली विकासखंड में जंगलों का धधकना लगातार जारी है। पिछले तीन महीनों के भीतर यह तीसरी बार है जब क्षेत्र के जंगल भीषण आग की चपेट में आए हैं। शनिवार को जखोली मुख्यालय के समीपवर्ती जंगलों और तुनेटा-लेख लावड़ी क्षेत्र में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया है, जिससे चारों ओर धुएं का गुबार छा गया है। इस दावानल से न केवल वन संपदा का भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि भीषण धुएं के कारण छोटे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

स्थानीय निवासी उम्मेद सिंह राणा, विजयपाल सिंह नेगी, शम्भू प्रसाद कोठारी क्षेत्र पंचायत सदस्य का कहना है कि जिस वन विभाग का प्राथमिक दायित्व ही जंगलों की सुरक्षा है, यदि वही इसे बचा पाने में विफल साबित हो रहा है, तो विभाग के औचित्य पर सवाल उठना लाजिमी है। गौरतलब है कि इस बार ठंड के मौसम (जनवरी-फरवरी) में भी आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो चिंता का विषय हैं। काश्तकारों की घटती संख्या के चलते वनों पर मानवीय निर्भरता कम हुई है, इसके बावजूद आग पर काबू पाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। 'पिरूल से आर्थिकी' और विद्युत उत्पादन जैसी विभागीय योजनाएं भी धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। यदि समय रहते वन विभाग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो आने वाले समय में क्षेत्र का पर्यावरण और अधिक संकट में पड़ जाएगा।

वन क्षेत्राधिकारी दक्षिणी जखोली हरीश थपलियाल ने कहा कि शुष्क मौसम होने के कारण आग की घटनाएं बढ़ रही हैं व आग पर वन विभाग की टीम ने काबू पा लिया है व आग लगाने वाले कि सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा व 5000 का इनाम देने की बात कही है।

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