परीक्षा पे चर्चा' में चमके रोहन, पर खतरे में है उनकी पाठशाला

'परीक्षा पे चर्चा' के 9वें संस्करण में जनपद रुद्रप्रयाग के पालाकुराली गांव के रोहन सिंह राणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किया सीधा संवाद,
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परीक्षा पे चर्चा' में चमके रोहन, पर खतरे में है उनकी पाठशाला: बदहाली के साये में 'देवभूमि' का भविष्य

भवन की नींव में दरार, खतरे में 28 छात्रों का जीवन, सिस्टम की सुस्ती और जर्जर सड़कें, अब है ​विभागीय कार्यवाही का इंतज़ार।

'परीक्षा पे चर्चा' के 9वें संस्करण में जनपद रुद्रप्रयाग के पालाकुराली गांव के छात्र रोहन सिंह राणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा संवाद कर न केवल देवभूमि का मान बढ़ाया, बल्कि अपनी पहाड़ी सौगातों—अर्सा, रिंगाल की फूलकंडी और पहाड़ी बुखणा—से पीएम का दिल भी जीत लिया। शहीद पूर्ण सिंह राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के कक्षा 9 के छात्र रोहन की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल है, लेकिन इस चमक के पीछे एक डरावनी सच्चाई भी छिपी है।

​जिस विद्यालय ने प्रधानमंत्री से संवाद करने वाली प्रतिभा दी है, उसकी अपनी स्थिति अत्यंत जर्जर है। विद्यालय भवन के आंगन और नींव में 2024 से पूर्व का भू-धंसाव बना हुआ है, जिससे भवन कभी भी जमींदोज हो सकता है। वर्तमान में यहाँ कक्षा 9 और 10 के 28 छात्र अध्ययनरत हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए 7 शिक्षक तैनात हैं। प्रतिभाओं को तराशने वाला यह केंद्र आज खुद सरकारी सिस्टम की अनदेखी का शिकार है, जहाँ हर पल नौनिहालों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है।

ग्राम प्रधान ममता देवी का कहना है कि विभाग को कई बार इस खतरे से अवगत कराया गया, लेकिन भू-धंसाव इतना अधिक है कि ग्राम पंचायत या मनरेगा के बजट से इसका समाधान संभव नहीं है। विडंबना केवल स्कूल तक सीमित नहीं है; गांव को जोड़ने वाले मयाली-घनसाली मोटर मार्ग से गावँ को दुग्गड्डा व फतेडु के पास से दो जगह से जोड़ा गया है  पर मोटरमार्ग की हालत इतनी दयनीय है कि सामान्य व्यक्ति का चलना भी दूभर है। सवाल यह उठता है कि जिस विद्यालय का छात्र देश के सर्वोच्च मंच पर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर रहा है, उस विद्यालय की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग इतने लंबे समय से मौन क्यों है?

​इस पूरे मामले पर बीईओ जखोली, वाई.एस. रावत का कहना है कि विद्यालय भवन के आगे भू-धंसाव से संबंधित पत्रावली अब आरईएस (RES) विभाग के पास कार्य सम्पादन हेतु गई है और कार्यवाही गतिमान है। हालांकि, गतिमान कार्यवाही और धरातल की हकीकत के बीच का अंतर छात्रों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न बना हुआ है। क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है या रोहन जैसे होनहार छात्रों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाएगा? जिस प्रदेश की प्रतिभाएं देश के सर्वोच्च मंच पर देवभूमि का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, क्या उन्हें एक सुरक्षित छत मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता में नहीं होना चाहिए? रोहन की सफलता ने व्यवस्था को आईना दिखाया है कि यदि संसाधनों का अभाव न हो, तो उत्तराखंड की पहाड़ियों से ऐसे कई और रत्न निकल सकते हैं।

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