वनाग्नि सुरक्षा सप्ताह: जखोली में ग्रामीणों व छात्रों को किया जागरूक।
वनाग्नि: स्वास्थ्य और पर्यावरण पर दोहरा प्रहार, सामूहिक जिम्मेदारी का संकल्प।
जखोली: वनाग्नि सुरक्षा सप्ताह के अंतर्गत आज उत्तरी व दक्षिणी जखोली रेंज द्वारा विभिन्न ग्राम सभाओं और शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। ग्राम सभा गोरती, चन्दी कोठियाडा, पुजारगाव समेत राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पांडवथली और प्राथमिक विद्यालय उरौली में आयोजित गोष्ठियों के माध्यम से वनाग्नि के घातक परिणामों पर चर्चा की गई।
वनाग्नि केवल पेड़ों को ही राख नहीं करती, बल्कि यह हमारे पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य पर गहरा प्रहार करती है। वनों में लगने वाली आग से निकलने वाला सूक्ष्म धुआं (PM2.5) फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बनता है, जो विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा है।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देखें तो आग के कारण बेशकीमती वनस्पति, वन्यजीवों के आवास और जैव-विविधता नष्ट हो जाती है। आग की तपिश से जमीन की ऊपरी उपजाऊ परत जल जाती है, जिससे भविष्य में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है और जल स्रोतों के सूखने की समस्या पैदा होती है।
कार्यक्रम के दौरान उत्तरी जखोली के वन क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र सिंह ने वनाग्नि से होने वाले नुकसानों पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"हमें यह समझना होगा कि हमारा अस्तित्व सीधे तौर पर वनों से जुड़ा है। 'पहले वन, फिर हम' केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। यदि वन सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो भविष्य में पानी की कमी और प्राकृतिक आपदाओं का सामना हमें ही करना होगा। वनाग्नि से होने वाली हानि की भरपाई दशकों तक नहीं हो पाती।"
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे वनाग्नि काल में विभाग के साथ 'प्रथम सूचना प्रदाता' के रूप में जुड़ें और आग की घटना की जानकारी तुरंत साझा करें।
अधिकारियों ने जोर दिया कि वनों को बचाना केवल सरकारी विभाग की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। गोष्ठियों में वन विभाग के कर्मचारी, स्थानीय शिक्षक, भारी संख्या में ग्रामीण और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिन्होंने वनों को सुरक्षित रखने और आग न लगाने का सामूहिक संकल्प लिया।





