उत्तराखंड वन विभाग में 'कार्बेट' जैसा बड़ा घोटाला: IFS विनय भार्गव पर CBI और ED की तलवार, मुनस्यारी इको-हट निर्माण में करोड़ों की हेराफेरी।
वित्तीय अनियमितताओं और नियमों को ताक पर रखकर निजी संस्थाओं को लाभ पहुँचाने के गंभीर आरोप।
देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग में एक बार फिर भ्रष्टाचार का बड़ा जिन्न बाहर आया है। जिम कार्बेट नेशनल पार्क में हुए चर्चित घोटाले की तर्ज पर अब पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में 'इको टूरिज्म' के नाम पर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे करने का मामला प्रकाश में आया है। इस घोटाले के केंद्र में वरिष्ठ IFS अधिकारी डॉ. विनय कुमार भार्गव हैं, जिन पर पद के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं और नियमों को ताक पर रखकर निजी संस्थाओं को लाभ पहुँचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI और ED (प्रवर्तन निदेशालय) से जांच कराने की सिफारिश शासन को भेज दी है।
मामला वर्ष 2019 का है, जब डॉ. विनय भार्गव पिथौरागढ़ में प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) के पद पर तैनात थे। आरोप है कि मुनस्यारी रेंज के आरक्षित वन क्षेत्र में बिना किसी वैधानिक अनुमति के डोरमेट्री, वन कुटीर उत्पाद विक्रय केंद्र, 10 वीआईपी इको हट्स और ग्रोथ सेंटर का अवैध निर्माण कराया गया। इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 1.63 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई है। जाँच रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण कार्यों के लिए न तो कोई सार्वजनिक टेंडर निकाला गया और न ही पारदर्शिता बरती गई। एक निजी संस्था को अवैध रूप से ठेका देकर एकमुश्त भुगतान कर दिया गया, जो सीधे तौर पर वित्तीय नियमावली का उल्लंघन है।
इस घपले की विस्तृत जाँच तेजतर्रार वरिष्ठ IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को सौंपी गई थी। उन्होंने अगस्त से दिसंबर 2024 के बीच गहन छानबीन कर 700 पृष्ठों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
अवैध MOU: एक निजी संस्था (ईडीसी पातलथौड़) के साथ बिना सक्षम अनुमोदन के समझौता किया गया, जिससे पर्यटन से होने वाली आय का 70 प्रतिशत हिस्सा उस संस्था को हस्तांतरित कर दिया गया। चर्चा है कि यह संस्था किसी प्रभावशाली विधायक से जुड़ी है।
कानूनों की धज्जियां: आरक्षित वन क्षेत्र में सीमेंट-मोर्टार के पक्के ढांचे खड़े कर दिए गए, जिसके लिए वन संरक्षण अधिनियम-1980 की धारा-2 के तहत केंद्र सरकार से कोई अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई थी।
फर्जी खर्च: रिकॉर्ड में जहां केवल 14.6 किमी फायरलाइन दर्ज है, वहां कागजों पर 90 किमी फायरलाइन दिखाकर लाखों रुपये का फर्जी व्यय दर्शाया गया।
IFS विनय भार्गव पर पूर्व में भी (2015 में) वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, लेकिन तब उन्हें "अनुभव की कमी" बताकर बचा लिया गया था। सूत्रों का कहना है कि उनकी शादी एक कैबिनेट मंत्री की भतीजी से हुई है, जिसके चलते वे लंबे समय से प्रभावशाली पदों पर जमे रहे। घोटाले की साजिश का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुनस्यारी के प्रोजेक्ट का ऑडिट उत्तराखंड के बजाय हजारों किलोमीटर दूर राजस्थान के जैसलमेर की एक फर्म से कराया गया, जो अब जांच के दायरे में है।
मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद, शासन ने डॉ. विनय भार्गव को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक उत्तर न मिलने पर मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रसिद्ध फिल्म निर्माता शेखर कपूर के इन हट्स में ठहरने की पुष्टि भी हुई है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह केंद्र पूरी तरह व्यावसायिक रूप से संचालित हो रहा था।


