शहद की मिठास से बदलेगी पहाड़ की तस्वीर: रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की अनूठी पहल।
R.D.F. (Restoration of Degraded Forest) योजना के अंतर्गत रोठिया ग्राम सभा में "वन उपज से आजीविका संवर्धन" विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला।
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन को रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में रुद्रप्रयाग वन प्रभाग ने एक ठोस कदम उठाया है। दक्षिणी जखोली रेंज के अंतर्गत RDF (Restoration of Degraded Forest) योजना के माध्यम से रोठिया ग्राम सभा में तीन दिवसीय 'वन उपज से आजीविका संवर्धन' कार्यशाला का आयोजन किया गया। 20 जनवरी से 22 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में ग्रामीणों को पारंपरिक शहद उत्पादन के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से मधुमक्खी पालन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। मैसर्स ग्रीनहट ऑर्गेनिक ग्लोबल पहाड़ी के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस शिविर में महिलाओं और युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाले शहद के साथ-साथ पराग (Pollen) और रॉयल जेली जैसे बहुमूल्य उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमक्खी पालन एक ऐसा कृषि आधारित उद्योग है, जिसे भूमिहीन किसान, महिलाएं और बुजुर्ग भी आसानी से अपनाकर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। कार्यशाला में विशेष रूप से 'एपिस सेरेना' मधुमक्खी पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो उत्तराखंड की जलवायु के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है।
प्रशिक्षण में शामिल स्थानीय महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिला। भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए प्रतिभागी महिला ने कहा:
"मधुमक्खी पालन हमारे लिए केवल शहद निकालने का काम नहीं, बल्कि स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बनेगा। आधुनिक तकनीकों को सीखकर हम न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारेंगे, बल्कि परागण के जरिए अपने जंगलों और पर्यावरण के संरक्षण में भी योगदान देंगे।" — कमला देवी व सुशीला देवी, स्थानीय प्रतिभागी
वन क्षेत्राधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि इस पहल का मुख्य लक्ष्य ग्रामीणों को वनों के संरक्षण से जोड़ते हुए उनकी आजीविका को सुरक्षित करना है। पहाड़ की विषम परिस्थितियों में इस तरह के स्टार्टअप न केवल पलायन पर अंकुश लगाएंगे, बल्कि 'लोकल फॉर वोकल' के सपने को भी साकार करेंगे।


