मनरेगा का नाम बदलने पर भड़की कांग्रेस

मनरेगा का नाम बदलने पर प्रदर्शन,
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मनरेगा का नाम बदलने पर भड़की कांग्रेस: रुद्रप्रयाग के जखोली में कार्यकर्ताओं का 'हल्ला बोल' और उपवास।

गांधीवादी विचारधारा का अपमान और आंदोलन की चेतावनी।

जखोली (रुद्रप्रयाग): केंद्र सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी योजना 'मनरेगा' (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन’ (VBGRAMJI) किए जाने के फैसले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस बदलाव के विरोध में उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद के जखोली विकासखण्ड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को गांधीवादी विचारधारा और ग्रामीणों के हक पर सीधा हमला बताते हुए एक दिवसीय सांकेतिक उपवास रखकर अपना विरोध दर्ज कराया।

अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष मौन और गर्जना

मंगलवार सुबह 11 बजे विकासखण्ड मुख्यालय परिसर में स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रदीप थपलियाल के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता जुटे। शाम 4 बजे तक चले इस उपवास कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार योजनाओं का नाम बदलकर इतिहास और महापुरुषों के योगदान को मिटाने की कोशिश कर रही है।

योजना की 'मूल आत्मा' पर प्रहार का आरोप

कांग्रेस नेताओं ने इस बदलाव को केवल नाम का परिवर्तन नहीं, बल्कि योजना की नींव को कमजोर करने वाली साजिश करार दिया। पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप थपलियाल और ब्लॉक अध्यक्ष महावीर सिंह पंवार ने संयुक्त रूप से कहा कि:

  • अधिकारों का हनन: 2005 में शुरू हुई इस योजना की मूल भावना 'काम की गारंटी' और 'जवाबदेही' थी। नए नियमों के तहत अब ग्रामीण सीधे अपनी ग्राम पंचायत से काम नहीं मांग सकेंगे, बल्कि केंद्र सरकार तय करेगी कि किस गांव में क्या काम होगा।

  • फंडिंग का बोझ: योजना के वित्तीय ढांचे में बदलाव कर राज्यों पर 40% वित्तीय बोझ डालने की कोशिश की जा रही है, जिससे राज्य सरकारों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

  • धरातल की हकीकत: आंकड़ों का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि कागजों पर कार्यदिवस बढ़ाने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में मजदूरों को साल में औसतन 40 दिन का काम भी नहीं मिल पा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से योजना के नाम से 'महात्मा गांधी' का नाम हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे गांधीवादी मूल्यों का अपमान बताया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिस तरह देश के किसानों ने एकजुट होकर काले कृषि कानूनों को वापस कराया था, उसी तरह कांग्रेस भी मनरेगा के पुराने स्वरूप की बहाली के लिए न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक बड़ा जन-आंदोलन शुरू करेगी।

इस विरोध प्रदर्शन में ब्लॉक प्रमुख विनीता चमोली, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी हयात सिंह राणा, कनिष्ठ प्रमुख राजेंद्र सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में महिला मंगल दलों की अध्यक्षों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाएंगे और ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे।


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