भालू से संघर्ष के बाद बची जान

पहाड़ भालू के हमले बढ़ने के कारण होती घटनाओं पर कैसे लगेगी रोक,
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नंदानगर में भालू का खौफ: संघर्ष के बाद बची चरवाहे की जान।

 एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश AIIMS भेजा गया।

नंदनगर (चमोली): उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हिंसक वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला नंदनगर क्षेत्र के ग्राम पंचायत खुनाना से सामने आया है, जहाँ आज सुबह एक भालू ने ग्रामीण पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से ऋषिकेश एम्स (AIIMS) रेफर किया गया है।

​मौत के मुँह से लड़कर लौटे केसर सिंह

​जानकारी के मुताबिक, आज दिनांक 1 जनवरी 2026 की सुबह लगभग 11 बजे, खुनाना निवासी केसर सिंह कठैत (39) पुत्र आनंद सिंह कठैत अपनी बकरियों को लेकर जंगल की ओर जा रहे थे। घर से कुछ ही दूरी पर घात लगाकर बैठे भालू ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। केसर सिंह ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए निहत्थे ही भालू का सामना किया और काफी देर तक उससे भिड़ते रहे। जब भालू उन पर हावी होने लगा, तो उन्होंने जान बचाने के लिए भागने का प्रयास किया, तभी भालू ने पीछे से वार कर उन्हें लहुलुहान कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद केसर सिंह किसी तरह भालू के चंगुल से भाग निकलने में सफल रहे।

​तत्काल राहत और ग्रामीणों का आक्रोश

​सुरक्षित स्थान पर पहुँचने के बाद केसर सिंह ने फोन के जरिए परिजनों को आपबीती सुनाई, जिसके बाद ग्रामीण और उनके भाई उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नंदनगर ले गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें तत्काल एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स भिजवाया। चिकित्सकों के अनुसार, फिलहाल उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।

​तंत्र की विफलता पर उठते सवाल

​नंदनगर के विभिन्न गाँवों में आए दिन हो रहे इन हमलों से क्षेत्रीय जनता में भारी आक्रोश और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार और विभाग के पास जंगली जानवरों के हमलों को रोकने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि:

  • ​योजनाएं केवल कागजों और बजट खपाने तक सीमित रह गई हैं।
  • ​जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में आने के कारणों का स्थाई निदान नहीं ढूंढा जा रहा है।
  • ​आम पहाड़ी नागरिक आज अपनी ही जमीन पर जान की भीख मांगने को मजबूर है।

​स्थानीय निवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि केवल मुआवजे तक सीमित न रहकर, इन हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में केसर सिंह जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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