नरसिंह मंदिर पालाकुराली में 5 दिवसीय महायज्ञ प्रारम्भ।
पशु बलि प्रथा त्याग कर वर्षों से हो रहा है हवन-यज्ञ।
जखोली (रुद्रप्रयाग): विकासखंड जखोली के अंतर्गत ग्राम पंचायत पालाकुराली में आराध्य भगवान नरसिंह देवता के मंदिर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 5 दिवसीय भव्य महायज्ञ का शुभारंभ हो गया है। मकर संक्रांति (14 जनवरी) के शुभ अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान का प्रारंभ हुआ, जो आगामी 18 जनवरी तक चलेगा।
सामाजिक परिवर्तन का केंद्र है यह मंदिर
इस मंदिर का इतिहास बेहद गौरवशाली और प्रेरणादायक रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, 40 के दशक तक यहाँ बकरे-खाडू की बलि देने की प्रथा प्रचलित थी। लेकिन 40 के दशक की शुरुआत में ही क्षेत्रवासियों ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए बलि प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया। तब से यहाँ पशु बलि के स्थान पर सात्विक 'हवन-यज्ञ' की परंपरा कायम हुई, जो पिछले पांच दशकों से निरंतर जारी है।
श्रद्धा और आस्था का संगम
लस्या पट्टी के आराध्य नरसिंह देवता के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा है। पहले जहाँ लोग मन्नत पूरी होने पर बलि चढ़ाते थे, वहीं अब मंदिर में सैकड़ों-हजारों घंटों के साथ-साथ बर्तन, निशान और नकद राशि भेंट स्वरूप दी जाती है। इस दान राशि का उपयोग मंदिर के आयोजन और भव्य भंडारे के लिए किया जाता है।
क्षेत्र की खुशहाली के लिए अनुष्ठान
महायज्ञ के दौरान पंचांग पूजा, रात्रि जागरण और विशेष हवन किए जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. गुलाब सिंह ने क्षेत्र की जनता से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर यज्ञ-अनुष्ठान में भाग लें और नरसिंह देवता का आशीर्वाद प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि आयोजन के अंतिम चरणों में नागेंद्र सौंड़ से 1.5 किमी लंबी भव्य कलश (शोभा) यात्रा भी निकाली जाएगी।
इस धार्मिक आयोजन से न केवल क्षेत्र में खुशहाली की कामना की जा रही है, बल्कि यह आयोजन सामाजिक एकता और कुप्रथाओं के उन्मूलन का प्रतीक भी बना हुआ है।


