रामरतन पवांर/जखोली
ग्राम पंचायत त्यूंखर मे चल रहे 9 दिवसीय नागनृत्य का हुआ समापन।
31 फिट लम्बे नाग को नचा खेलाकर किया गया विसर्जित।
नाग नृत्य के दौरान सैकड़ो भक्तों ने लिया नागराजा से मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद।
जखोली - पहाड़ मे लोग आज भी अपनी अपनी धार्मिक एवं संस्कृति को बचाये रखने के लिए देवी देवताओं का मंडाण, जागर, पँवाड़ों से देवस्तुति की प्रथा आज भी निरन्तर चली आ रही है।। इसी मान्यता के आधार पर आज भी अनेको देवी, देवतो पहाड़ों पर विभिन्न रूप मे निवास करते है।
ग्राम पंचायत त्यूंखर मे भगवान नागराजा देवता का नौ दिवसीय मंडाँण शूरु किया गया था। इस नौ दिन के नागनृत्य अन्तर्गत आठवें दिन नाग को लाने की भी प्रक्रिया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार जिस कालिया नाग को भगवान श्रीकृष्ण ने मथा था, वह नाग नंदगाँव बृन्दावन मे यमुना नदी रहता था। कहा जाता है भगवान कृष्ण जब गेंद खेलते खेलते जमुना नदी के तट पर पहुंचे तो तब श्रीकृष्ण का गेंद जमुना मे गिर गया तो उस गेद को लेने कृष्ण नदी मे कूद जाते है और कालिया से युद्ध कर उसको समर्पण करने को मजबूर कर देते है।
इसी तर्ज पर आज सदियों से विकासखंड जखोली के 24 गाँवो मे नागनृत्य का आयोजन किया जाता है ग्राम पंचायत त्यूंखर मे भी सदियों से चले आ रहे नागनृत्य (कौथीग)का आयोजन हर तीसरे वर्ष बड़े धूमधाम से किया जाता है।
आपको यह भी अवगत करा दे कि नागनृत्य के दौरान नागराजा के भक्तों के द्वारा अपने अपने घरो से गाय,भैंस का ताजा दूध, मक्खन ले जाया जाता है जिसको कि नागराजा देवता को खाने को दिया जाता है।
कहा जाता है कि अगर मान्यता के अनुसार गाँवो मे नाग को नही नचाया जाता है तो नागराजा गाय भैंस पर दोष करते है और गाय, भैस दूध देने मे आना कानी करते है इसलिए इस दोष को मिटाने के लिए ढौंर, थकुले की धुन पर नाग देवता को नचाया जाता है ।नागनृत्य मे उपस्थित सैकड़ो भक्तों ने देवता से मनोकामना पूर्णहोने का आशिर्वाद माँगा।
नागनृत्य के दौरान त्यूंखर गाँव के निवासियों द्वारा 31 फिट लम्बे नाग को बनाया गया था। जिसको कि 9वें दिवस पर नचा कर विसर्जित किया गया।
इस मौके पर देव समिति के अध्यक्ष शिवराज सिह कैन्तूरा ने इस धार्मिक कार्य को निर्विवाद व शान्तिपूर्ण तरीके से निभाने हेतू समस्त ग्रामीणों व आयोजक समिति का आभार व्यक्त किया
इस अवसर पर देव समिति के अध्यक्ष शिवराज सिह कैन्तूरा, कोषाध्यक्ष कविन्द्र सिह पवांर, उदय सिह पवांर, गोविंद सिह पवांर, सामाजिक कार्यकर्ता रघुवीर सिह कैन्तूरा, गम्भीर सिह पवांर, शिव सिह पवांर, रघुवीर पवांर, उपप्रधान सूरबीर सिह राणा, पूर्व प्रधान महावीर सिह बुटोला, सरत सिह पवांर सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।


