रुद्रप्रयाग के धाकड़' भरत चौधरी को मिली केबिनेट कमान

उत्तराखंड कैबिनेट विस्तार 5 विधायकों को मिली जिम्मेदारी,
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उत्तराखंड कैबिनेट विस्तार: चुनावी दहलीज पर 'रुद्रप्रयाग के धाकड़' भरत चौधरी को मिली कमान, क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधा।

रुद्रप्रयाग का बढ़ा कद: भरत सिंह चौधरी ने ली शपथ, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का ।

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक कुछ माह पहले राज्य की धामी सरकार ने अपना बहुप्रतिक्षित कैबिनेट विस्तार पूर्ण कर लिया है। राजनैतिक गलियारों में लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए लोकभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल की मौजूदगी में पांच नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। महज 15 मिनट के भीतर संपन्न हुए इस शपथ ग्रहण समारोह ने राज्य की भावी चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय संतुलन की नई पटकथा लिख दी है।

इस कैबिनेट विस्तार का सबसे प्रमुख आकर्षण रुद्रप्रयाग विधानसभा से दो बार के विधायक भरत सिंह चौधरी रहे। अपनी बेबाक कार्यशैली और क्षेत्र में गहरी पैठ के कारण 'दबंग और धाकड़' नेता के रूप में पहचाने जाने वाले चौधरी ने संस्कृत भाषा में शपथ लेकर सबको प्रभावित किया। वर्ष 2017 से लगातार विधानसभा में रुद्रप्रयाग का प्रतिनिधित्व कर रहे भरत सिंह चौधरी ने 2022 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को करीब 10 हजार मतों के भारी अंतर से पराजित किया था। उनकी प्रशासनिक क्षमता और जमीनी पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा के दौरान उनकी सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की थी।

रुद्रप्रयाग विधानसभा न केवल केदारनाथ धाम का प्रवेश द्वार है, बल्कि यह बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के सेंटर पॉइंट के रूप में भी सामरिक महत्व रखती है। राज्य गठन के बाद से रुद्रप्रयाग जिले की इस सीट को कैबिनेट में स्थान मिलना जिले के विकास और स्थानीय समस्याओं, विशेषकर पर्वतीय बुनियादी ढांचे के समाधान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

धामी सरकार ने इस विस्तार के माध्यम से उत्तराखंड के जटिल राजनैतिक समीकरणों को साधने की पुरजोर कोशिश की है। मंत्रिमंडल में शामिल किए गए पांच चेहरों में जातीय विविधता का विशेष ध्यान रखा गया है:

  • अनुसूचित जाति से राजपुर विधायक खजान दास और ब्राह्मण वर्ग से हरिद्वार विधायक मदन कौशिक को शामिल कर पुराने अनुभवों पर भरोसा जताया गया है।

  • पंजाबी समाज से रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा और ठाकुर समाज से भीमताल विधायक राम सिंह कैड़ा व रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी को जगह देकर मैदानी और पर्वतीय वोट बैंक के बीच सेतु बनाने का प्रयास किया गया है।

  • जहाँ चौधरी, बत्रा और कैड़ा पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं खजान दास और मदन कौशिक पूर्व में भी इस पद पर रह चुके हैं।

इस विस्तार के साथ ही उत्तराखंड मंत्रिमंडल में सदस्यों की संख्या अब 12 हो गई है, जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार अधिकतम सीमा है। राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के बीच संतुलन बिठाने के साथ-साथ 'मिशन-2027' की तैयारियों को धार देने के लिए यह विस्तार अनिवार्य था। केदारनाथ और रुद्रप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण जनपदों को सीधे सत्ता के केंद्र में भागीदारी देना यह दर्शाता है कि सरकार चारधाम यात्रा मार्ग और सीमावर्ती जिलों के विकास को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रख रही है।

भरत सिंह चौधरी जैसे ऊर्जावान नेतृत्व को मंत्रिमंडल में शामिल करने से रुद्रप्रयाग और केदारनाथ घाटी में विकास कार्यों, विशेषकर वैकल्पिक यात्रा मार्गों और सड़क सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को नई गति मिलने की उम्मीद है। अब देखना यह होगा कि चुनाव से ठीक पहले हुआ यह 'दांव' सत्ता पक्ष के लिए कितना लाभकारी सिद्ध होता है।


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