पहाड़ की ‘रीढ़’ पर वन्यजीवों का वार: ऊखीमठ के पथलीधार गावँ में भालू के हमले से संघर्ष कर लौटी महिला।
अस्तित्व का संघर्ष: दरांती के दम पर जीती जंग।
रुद्रप्रयाग। पहाड़ की विषम परिस्थितियों में परिवार और आर्थिकी का बोझ ढोने वाली मातृशक्ति आज जंगली जानवरों के निशाने पर है। जनपद के ऊखीमठ तहसील अंतर्गत ग्राम पठाली में रविवार को घास लेने गई 55 वर्षीय महिला रामेश्वरी देवी पर भालू के खूनी हमले ने एक बार फिर वन विभाग के दावों की पोल खोल दी है। मौत को सामने देख महिला ने जिस अदम्य साहस से दरांती के वार से भालू को खदेड़ा, वह चर्चा का विषय है, लेकिन इस संघर्ष ने पहाड़ की महिलाओं की सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, पठाली निवासी रामेश्वरी देवी रविवार सुबह करीब 11 बजे 'रेठी सुबदा तोक' में घास काट रही थीं। तभी घात लगाए भालू ने उन पर पीछे से हमला कर दिया। भालू ने उनके सिर और चेहरे को बुरी तरह लहूलुहान कर दिया। इस दौरान महिला खेत से नीचे गिर गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और हाथ में पकड़ी दरांती से भालू पर जवाबी प्रहार शुरू कर दिए। उनके शोर मचाने पर ग्रामीणों को आता देख भालू जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ। गंभीर रूप से घायल महिला को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग रेफर किया गया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय भालुओं के व्यवहार में आया बदलाव है। अमूमन सर्दियों के इस मौसम में भालू 'हाइबरनेशन' (शीत निंद्रा) में चले जाते हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन और जंगलों में भोजन की कमी के कारण अब वे सक्रिय होकर आबादी वाले क्षेत्रों में महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। घास-लकड़ी के लिए जंगलों पर निर्भर महिलाओं के लिए अब हर कदम पर मौत का साया मंडरा रहा है।
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि जनपद में भालू के हमलों की बाढ़ आई हुई है, मगर विभाग कुंभकर्णी नींद में है। न संवेदनशील इलाकों में पिंजरे लगाए गए हैं और न ही गश्त बढ़ाई गई है। दूसरी ओर, डीएफओ रजत सुमन का कहना है कि महिला का उपचार करा दिया गया है और गांव में वन विभाग की टीम तैनात कर दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि जब तक ठोस नीति नहीं बनती, तब तक पहाड़ की रीढ़ कही जाने वाली महिलाएं इसी तरह असुरक्षित रहेंगी।


