वनाग्नि से निपटने के लिए कोदिमा के जंगलों में मॉक ड्रिल, परखा विभागों का दम।
आगामी फायर सीजन की चुनौतियों को देखते हुए रुद्रप्रयाग वन प्रभाग ने अपनी कमर कस ली है। बुधवार को धनपुर और कोदिमा के दुर्गम वन क्षेत्रों में दो दिवसीय वृहद 'फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल' का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वनाग्नि जैसी आपातकालीन स्थितियों में विभिन्न सरकारी विभागों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करना और रिस्पॉन्स टाइम (त्वरित प्रतिक्रिया) की सटीकता को जांचना था।
अभियान की रूपरेखा 17 फरवरी को प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) कार्यालय में आयोजित 'टेबल टॉप एक्सरसाइज' के साथ शुरू हुई। इंसिडेंट कमांडर व डीएफओ श्री रजत सुमन की अध्यक्षता में अधिकारियों ने रणनीति साझा की। इसके अगले दिन, 18 फरवरी को सुबह 10:30 बजे कोदिमा बीट में आग लगने की सूचना के साथ ही फील्ड ऑपरेशन शुरू हुआ। सूचना मिलते ही 'इंसिडेंट कमांड सिस्टम' सक्रिय हो गया और मात्र 5 मिनट के भीतर रुद्रप्रयाग क्रू स्टेशन की टीम ने मौके पर पहुँचकर मोर्चा संभाल लिया।
जब आग ने विकराल रूप धारण कर आबादी की ओर बढ़ना शुरू किया, तो प्रशासन ने तुरंत अग्निशमन दल, SDRF, DDRF, पुलिस, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग को अलर्ट मोड पर डाल दिया। इस संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 7 विभागों के 84 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। अभ्यास के दौरान न केवल आग पर नियंत्रण पाया गया, बल्कि धुएं से प्रभावित एक घायल फायर वॉचर को सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार देने का भी सफल प्रदर्शन किया गया। आधुनिक वॉटर टैंकरों और उपकरणों की मदद से करीब पौने दो घंटे के भीतर आग को पूरी तरह बुझा दिया गया।
डीएफओ श्री रजत सुमन ने सफल मॉक ड्रिल के बाद डीब्रीफिंग सत्र में बताया कि 12 वायरलेस सेट, फायर टेंडर और एम्बुलेंस का शत-प्रतिशत सटीक उपयोग यह दर्शाता है कि प्रशासन किसी भी आपदा के लिए मुस्तैद है। उन्होंने एसीएफ डॉ. दिवाकर पंत और देवेंद्र सिंह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह अभ्यास आगामी फायर सीजन में वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।





