वनाग्नि सुरक्षा सप्ताह: "जल-जंगल-जमीन" को बचाने के लिए रुद्रप्रयाग वन विभाग ने कसी कमर, ग्रामीणों से की अपील।
रुद्रप्रयाग। वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से आज, 5 फरवरी 2026 को रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की उत्तरी और दक्षिणी जखोली रेंज द्वारा संयुक्त रूप से जन-जागरूकता अभियानों का आयोजन किया गया। वनाग्नि सुरक्षा सप्ताह के तहत ग्राम सभा शीशों व तुनेटा के साथ-साथ प्राथमिक विद्यालय रायड़ी, पनशील एवं जाखनी में विशेष गोष्ठियां आयोजित की गईं, जिसमें वनों को आग से बचाने की शपथ ली गई।
पारिस्थितिकी संतुलन और '5-ज' का अस्तित्व
गोष्ठियों के दौरान वनाग्नि से होने वाले भयंकर दुष्परिणामों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने इसे सीधे तौर पर पारिस्थितिकीय असंतुलन से जोड़ा। ग्रामीणों को समझाया गया कि जंगल की आग केवल पेड़ों को ही नहीं जलाती, बल्कि यह जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन (मानव) के अस्तित्व पर भी सीधा प्रहार करती है। जंगलों के जलने से जल स्रोत सूख रहे हैं, जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है और बेजुबान वन्यजीवों का आशियाना छिन रहा है, जिसका सीधा असर भविष्य में मानव जीवन पर पड़ेगा।
कार्यक्रम के दौरान उत्तरी जखोली के वन क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि :-
"वन हमारी अमूल्य संपदा हैं और इनकी रक्षा करना हम सभी का सामूहिक उत्तरदायित्व है। वनाग्नि काल शुरू होने वाला है, ऐसे में ग्रामीण सजग रहें। यदि कहीं भी आग लगने की घटना दिखाई दे, तो उसे बुझाने में सहयोग करें और तत्काल वन विभाग को सूचित करें। आपके छोटे से सहयोग से हम अपनी 'हरीतिमा' और वन्यजीवों को सुरक्षित रख सकते हैं।"
वन विभाग के कर्मचारियों ने विद्यार्थियों और ग्रामीणों से अपील की कि वे कूड़ा-करकट जलाते समय सावधानी बरतें और वनों के आसपास आग न जलाएं। कार्यक्रम में विद्यालय के अध्यापक, भारी संख्या में ग्रामीण, छात्र-छात्राएं और वन विभाग की टीम मौजूद रही। सभी ने एक स्वर में वनों को अग्नि मुक्त रखने का संकल्प लिया।






