समान कार्य-समान वेतन की मांग-राजधानी में 'आर-पार' की चेतावनी

उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के संविदा कर्मचारियों का-राजधानी में 'आर-पार' की चेतावनी,
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 रामरतन पवांर/जखोली

समान कार्य-समान वेतन की मांग: जल संस्थान के संविदा कर्मचारियों ने फूंका बिगुल, राजधानी में 'आर-पार' की चेतावनी



कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें उपनल (UPNL) के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के समान वेतनमान दिया जाए।

रुद्रप्रयाग- उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। 'समान कार्य के बदले समान वेतन' की दशकों पुरानी मांग को लेकर कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रुद्रप्रयाग, कुमाऊं और पौड़ी गढ़वाल में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे देहरादून कूच कर निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।

 प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें उपनल (UPNL) के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के समान वेतनमान दिया जाए। इसके साथ ही, आंदोलनकारियों ने पौड़ी डिवीजन से 38 श्रमिकों को अवैध रूप से हटाए जाने पर कड़ा रोष व्यक्त किया। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि हटाए गए श्रमिकों को तत्काल बहाल किया जाए, अन्यथा विभाग में कार्य ठप कर दिया जाएगा।

 रुद्रप्रयाग जिला अध्यक्ष गिरीश नेगी ने संविदा कर्मियों की व्यथा साझा करते हुए कहा कि लगभग 3500 श्रमिक पिछले 20-25 वर्षों से विभाग की सेवा कर रहे हैं। इतने लंबे अनुभव के बावजूद उन्हें मात्र 10 से 12 हजार रुपये के न्यूनतम मानदेय पर गुजारा करना पड़ रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब इन श्रमिकों ने जान जोखिम में डालकर पेयजल आपूर्ति सुचारू रखी, लेकिन आज सरकार उन्हीं 'कोरोना योद्धाओं' को नजरअंदाज कर रही है।

 धरना प्रदर्शन के अंत में प्रांतीय महामंत्री मंगलेश लखेड़ा, प्रदेश उपाध्यक्ष बलवीर पयाल और गढ़वाल मंडल अध्यक्ष चन्द्र मोहन खत्री के नेतृत्व में जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही नहीं हुई, तो वे राजधानी देहरादून में उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन के चलते होने वाली किसी भी पेयजल अव्यवस्था के लिए पूरी तरह शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा। इस प्रदर्शन में संगठन के सैकड़ों पदाधिकारियों और श्रमिकों ने सरकार विरोधी नारेबाजी कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

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