रुद्रप्रयाग: मुन्नादेवल में सामाजिक क्रांति, शराब और अभद्रता पर ₹31,000 का भारी जुर्माना, उल्लंघन पर गांव से बहिष्कार।
जखोली (रुद्रप्रयाग): उत्तराखंड के पहाड़ों की शांत फिजाओं में घुलते नशे के जहर को रोकने के लिए विकासखंड जखोली की ग्राम सभा मुन्नादेवल ने एक ऐतिहासिक और कठोर कदम उठाया है। ग्राम प्रधान श्री पुनीत डिमरी की अध्यक्षता में हुई 'खुली बैठक' में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर गांव में शराब के सेवन, बिक्री और अभद्र व्यवहार पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नशे की भेंट चढ़ता पहाड़ और आर्थिक संकट
पहाड़ की संस्कृति अपनी सादगी और शांति के लिए जानी जाती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में नशे के बढ़ते प्रचलन ने यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया है। बैठक में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि शराब न केवल स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि गरीब परिवारों की कमर तोड़ रही है। एक तरफ जहाँ पहाड़ की खेती और संसाधनों से आमदनी सीमित है, वहीं शराब के प्रबंध में गाढ़ी कमाई लुटाने से गरीब आदमी के घर का बजट बिगड़ रहा है। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के बजाय पैसा नशे में खर्च हो रहा है, जिससे भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। इसी स्थिति को भांपते हुए ग्रामीणों ने एकजुट होकर कड़े निर्णय लिए हैं।
गत 14 जनवरी 2026 को आयोजित इस महापंचायत में क्षेत्र पंचायत सदस्य, युवक मंगल दल और महिला मंगल दल की मौजूदगी में निम्नलिखित नियम लागू किए गए:
₹31,000 का दंड: सार्वजनिक स्थलों या शादी-ब्याह में शराब परोसने या पीकर हंगामा करने पर ₹31,000 का जुर्माना देना होगा। यह राशि गांव के विकास कार्यों में खर्च होगी।
बिक्री पर पूर्ण रोक: गांव के भीतर शराब की खरीद-फरोख्त पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
अभद्रता पर कानूनी शिकंजा: जनप्रतिनिधियों या किसी भी ग्रामीण के साथ गाली-गलौज करने पर पुलिसिया कार्रवाई की जाएगी। यह नियम महिलाओं पर भी समान रूप से लागू होगा।
सामाजिक बहिष्कार: बार-बार नियमों को तोड़ने वालों को ग्राम सभा से बहिष्कृत किया जाएगा। साथ ही, दोषी का साथ देने वाले परिवारों को भी सामाजिक प्रतिबंधों का सामना करना होगा।
"गांव के विकास और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए कड़े कदम उठाना अब अनिवार्य हो गया है। हम अपने शांत वातावरण को नशे की भेंट नहीं चढ़ने देंगे।" — पुनीत डिमरी, ग्राम प्रधान
बैठक में उपस्थित सैकड़ों ग्रामीणों ने हाथ उठाकर और हस्ताक्षर कर इन फैसलों का समर्थन किया। इसमें दुर्गा देवी भट्ट, शशि देवी, सत्यभामा मैठाणी, सुदर्शन प्रसाद और क्षेत्र पंचायत सदस्य विपिन प्रसाद सहित मातृशक्ति और युवाओं की बड़ी भागीदारी रही।
मुन्नादेवल ग्राम सभा का यह फैसला उत्तराखंड के अन्य गांवों के लिए एक प्रेरणा है। यदि हर गांव इसी तरह एकजुट होकर नशे के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो 'नशामुक्त पहाड़' का सपना जल्द ही हकीकत में बदल सकता है।


