मयाली-गुप्तकाशी मोटरमार्ग के दिन बहुरेंगे: सुधारीकरण के लिए ₹80 करोड़ की कवायद शुरू।
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी की महत्वपूर्ण संपर्क लाइन और वर्ष 2013 की भीषण आपदा में 'जीवनरेखा' साबित हुए मयाली-गुप्तकाशी मोटरमार्ग के सुधारीकरण और चौड़ीकरण की राह आसान होने वाली है। केंद्र सरकार के सेंट्रल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (CRIF) मद के तहत इस मार्ग के लिए ₹80 करोड़ की भारी-भरकम राशि स्वीकृत करने की प्रक्रिया गतिमान है। इस बजट से न केवल स्थानीय ग्रामीणों की राह आसान होगी, बल्कि चारधाम यात्रा के प्रबंधन में भी यह मार्ग मील का पत्थर साबित होगा।
विभागीय स्पष्टीकरण और वर्तमान स्थिति
लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) रुद्रप्रयाग के सहायक अभियंता (AE) संजीव सैनी ने पूर्व में जारी सूचना में संशोधन करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा मयाली-गुप्तकाशी मोटरमार्ग के सुधारीकरण हेतु ₹80 करोड़ का एस्टीमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए उच्च स्तर पर भेज दिया गया है। वर्तमान में इसकी स्वीकृति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
तकनीकी विवरण के अनुसार, इस मोटरमार्ग का 37.5 किमी हिस्सा ऊखीमठ डिवीजन और 38 किमी हिस्सा रुद्रप्रयाग डिवीजन के अंतर्गत आता है। प्रशासनिक सुगमता को देखते हुए पूरे प्रोजेक्ट का संचालन रुद्रप्रयाग डिवीजन के माध्यम से ही किया जाएगा। विभाग अब आगामी तकनीकी औपचारिकताओं को पूर्ण करने में जुट गया है।
वैकल्पिक यात्रा मार्ग बनाने की उठी मांग
बजट की सुगबुगाहट के बीच क्षेत्रीय जनता इस मार्ग को 'वैकल्पिक श्री केदारनाथ यात्रा मार्ग' के रूप में विकसित करने की मांग पर अड़ी है। क्षेत्र की चार पट्टियों के ग्रामीणों का तर्क है कि गंगोत्री और यमुनोत्री से आने वाले तीर्थयात्रियों को यदि इस मार्ग से भेजा जाए, तो मुख्य मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
महापंचायत और संघर्ष समिति का गठन
अपनी मांगों को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने के लिए स्थानीय जनता ने लामबंदी तेज कर दी है। इसी क्रम में बीते 18 जनवरी को सिद्धसोड में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। इस दौरान सर्वसम्मति से एक संघर्ष समिति का गठन किया गया, जिसमें नरवीर सिंह को अध्यक्ष और नागेंद्र पँवार को महासचिव चुना गया। ग्रामीणों का कहना है कि 2013 की आपदा में इसी मार्ग ने हजारों लोगों की जान बचाई थी, अतः इसे आधिकारिक यात्रा मार्ग का दर्जा मिलना अनिवार्य है।


