चिरबटिया-गुप्तकाशी मार्ग को 'वैकल्पिक यात्रा मार्ग' घोषित करने की मांग

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केदारनाथ यात्रा को सुगम बनाने की बड़ी पहल: चिरबटिया-गुप्तकाशी मार्ग को 'वैकल्पिक यात्रा मार्ग' घोषित करने की मांग 

हस्ताक्षर अभियान शुरू, व्यापारियों का हुंकार: "जरूरत पड़ी तो करेंगे धरना-प्रदर्शन"

जखोली/रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की यात्रा को सुव्यवस्थित करने, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय विकास को नई गति देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण जन-अभियान का आगाज हुआ है। भाजपा के पूर्व प्रदेश सह मीडिया प्रभारी कमलेश उनियाल के नेतृत्व में चिरबटिया–मयाली–तैला–टाट–डंगवाल गांव–कुड़ी–अदूली–बसुकेदार–गुप्तकाशी मोटर मार्ग को 'वैकल्पिक केदारनाथ यात्रा मार्ग' घोषित करने की मांग तेज हो गई है।

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर चिरबटिया मार्केट से इस हस्ताक्षर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिसे स्थानीय जनता और व्यापारियों का भारी समर्थन मिल रहा है।

2013 की आपदा में बना था 'जीवन रेखा'

अभियान की अगुवाई कर रहे कमलेश उनियाल ने कहा कि केदारनाथ यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और आस्था की रीढ़ है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2013 की भीषण आपदा के दौरान, जब मुख्य मार्ग ध्वस्त हो गए थे, तब इसी चिरबटिया-मयाली-गुप्तकाशी मार्ग ने 'संजीवनी' की भूमिका निभाई थी। इसी रास्ते से लाखों तीर्थयात्रियों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षित निकाला गया था।

जाम और आपदा से मुक्ति का स्थायी समाधान

वर्तमान में रुद्रप्रयाग–तिलवाड़ा–अगस्त्यमुनि मार्ग पर यातायात का भारी दबाव रहता है। बरसात के समय बांसबाड़ा और कुण्ड जैसे संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन के कारण अक्सर यात्रा रुक जाती है।

  • समाधान: इस वैकल्पिक मार्ग के विकसित होने से मुख्य मार्ग पर दबाव कम होगा।

  • कनेक्टिविटी: यह मार्ग लगभग 40 से 78 गांवों को सीधे जोड़ता है।

  • आपदा प्रबंधन: आपातकालीन स्थिति में यह मार्ग सुरक्षित निकासी के लिए सबसे ठोस विकल्प है।

रिवर्स पलायन और रोजगार की नई उम्मीद

इस मांग के पीछे सबसे बड़ा तर्क स्थानीय स्वरोजगार है। कमलेश उनियाल ने बताया कि इस क्षेत्र के हजारों युवा वर्तमान में होटल लाइन में काम करने के लिए दूसरे राज्यों और विदेशों में हैं।

"यदि यह 92 किलोमीटर का क्षेत्र यात्रा मार्ग घोषित होता है, तो यहां होटल, होमस्टे, ढाबे, हस्तशिल्प और स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए बड़ा बाजार तैयार होगा। इससे युवाओं को घर के पास रोजगार मिलेगा और रिवर्स पलायन का सपना साकार होगा।"

व्यापारियों का हुंकार: "जरूरत पड़ी तो करेंगे धरना-प्रदर्शन"

इस अभियान को व्यापारियों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। व्यापारी बृजमोहन गोदियाल, उम्मेदसिंह राणा, ग्राम प्रधान कोठियाड़ा पवन राणा, प्रदीप भट्ट और नीलम देवी सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों ने दो-टूक कहा कि यह क्षेत्र के अस्तित्व की लड़ाई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार जल्द ही इस मार्ग को वैकल्पिक मार्ग घोषित कर इसके चौड़ीकरण का कार्य शुरू नहीं करती है, तो वे उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के लिए भी तैयार हैं।

सरकार तक पहुंचेगी जनता की आवाज

हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से हजारों लोगों की सहमति लेकर एक सामूहिक मांग पत्र मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार और शासन-प्रशासन को भेजा जाएगा। मांग है कि जनहित और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग का सुदृढ़ीकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी, दोनों पहाड़ के ही काम आ सकें।

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