शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर लटकी तलवार किसी भी समय हो सकती है गिरप्तारी

यालय द्वारा दिये गए निर्देशों के बाद भी सचिव माध्यमिम द्वारा इन भ्रष्टाचार के आरोपियों पर मुकदमा दर्ज करने अनुमति नही दी गयी। जिस पर अदालत में एक ओर ज
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 शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर लटकी तलवार किसी भी समय हो सकती है गिरप्तारी।

नियुक्ति में धाँधलीबाज धांधली करने से बाज नही आते यह खबर गाहे बगाहे अशासकीय विद्यालयों में नियुक्तियों के समय अधिकतर देखने को मिलती हैं कि धाँधलीबाज धाँधली कर गए। अभ्यर्थियों को सिर्फ प्रक्रिया पूरी करने के लिए बुलाया गया कुछ दिन शोर शराबा होता फिर मामला दब जाता है जिसके लिए शिक्षा सचिव उत्तराखण्ड शासन द्वारा आदेश जारी किए थे जिसमें उस समय पर अशासकीय स्कूलों में चल रही भर्ती प्रक्रिया को रोकने का मौखिक आदेश हुआ था।



जिसमें की कुछ जिलाशिक्षाधिकारियों ने यह कहकर नियुक्ति रोकने के लिए के लिये मना किया कि हमारे पास कोई लिखित आदेश न होने के कारण हम भर्ती प्रक्रिया को रोक नही सकते हैं।

एलईडी घोटाले के बाद अब स्टिंग मामले में तत्कालीन सीईओ मदन सिंह रावत, डीईओ हरेराम यादव और पटल सहायक दिनेश गैरोला को कभी भी पुलिस गिरप्तार कर सकती है।

नियुक्ति के लिए अनुमोदन देने के लिए पैसे लेते हुए पकड़ में आने के बाद उपरोक्त तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश आखिरकार शासन के द्वारा कर लिया गया।

नियुक्ति में धांधली के सम्बंध में प्राथमिकी पौड़ी थाने में दर्ज की गई है। ऑडियो की सत्यता की पुष्टि फ़ारसेंसिक जांच में हो चुकी है। जिसके बाद एएसपी पौड़ी द्वारा यह मामला एडीजे लॉ एंड ऑर्डर को आगे की कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है। यह मामला एडीजे द्वारा सचिव गृह को अग्रसारित के लिया गया है।

नियुक्ति मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दाखिल हुई थी। न्यायालय द्वारा दिये गए निर्देशों के बाद भी सचिव माध्यमिम द्वारा इन भ्रष्टाचार के आरोपियों पर मुकदमा दर्ज करने अनुमति नही दी गयी। जिस पर अदालत में एक ओर जनहित याचिका दायर की गई जिसपर मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी ओर ओर न्यायाधीश आर सी खुल्बे की डबल बेंच ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को स्वयं मामले को अपने स्तर से देखने और आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही करने और आरोपियों को बचाने के लिए मुकदमा चलाने की अनुमति न देने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने के आदेश जारी किए।

    न्यायालय के आदेश के अनुपालन में माध्यमिक शिक्षा सचिव रविनाथ रामन ने अपने अधीनस्थ कुछ कर्मचारियों को कार्यवाही में विलम्ब करने के लिए उक्त मामले में जांच अधिकारी की नियुक्ति के साथ साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है।

     शासन से अनुमति मिलने के बाद एडीजे लॉ एंड ऑर्डर ने एएसपी पौड़ी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पौड़ी के तत्कालीन मुख्य शिक्षा अधिकारी मदन सिंह रावत, जिला शिक्षा अधिकारी हरे राम यादव ओर पटल सहायक दिनेश गैरोला के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

अब देखना है अशासकीय विद्यालयों में उक्त आरोपियों के समय हुई भर्तियों की भी जांच होती है या नही।

सरकार को चाहिए कि अशाकीय विद्यालयों में भर्ती  की प्रक्रिया से जुड़े लोगों की सम्पत्ति की जांच लगे हाथों करनी चाहिए। अभ्यर्थी आस लेकर आतें हैं पर सेटिंग ओर लेन देन पूर्व में हो जाने के कारण योग्य अभ्यर्थी मायूस हो जाता है इन धंधलीबाजो के सामने।

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