राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के द्वितीय दिवस में बौद्धिक सत्र की धूम

राष्ट्रीय सेवा योजना एक नजर में- राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) भारत सरकार के युवा और खेल मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे औपचारिक रूप
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 राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के द्वितीय दिवस में बौद्धिक सत्र की धूम।

छात्रों के सर्वागीण विकास में समाज के प्रति अपने दायित्व ओर कर्तव्यों की समझ के साथ सहभागिता के गुणों को जीवन मे आत्मसाथ करवाकर अपने अभीष्ट को प्राप्त करने की समझ विकसित करने के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का आयोजन राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज सिद्धसोड द्वारा 50 छात्र छात्राओं के साथ आज द्वितीय दिवस में स्वयं सेवकों द्वारा जनता उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय दिगधार थाती बड़मा परिसर में स्वच्छता कार्यक्रम संचालित किया गया।

राष्ट्रीय सेवा योजना एक नजर में- राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) भारत सरकार के युवा और खेल मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे औपचारिक रूप से 24 सितंबर, 1969 को शुरू किया गया। यह ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों और स्कूलों के छात्र युवाओं को अवसर प्रदान करता है। भारत के कॉलेजों और विश्वविद्यालय स्तर पर तकनीकी संस्थान, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर विभिन्न सरकारी नेतृत्व वाली सामुदायिक सेवा गतिविधियों और कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए। एक सक्रिय सदस्य होने के नाते इन छात्र स्वयंसेवकों के पास एक कुशल सामाजिक नेता, कुशल प्रशासक और मानव स्वभाव को समझने वाले व्यक्ति होने का प्रदर्शन और अनुभव होगा।


शिविर के द्वितीय दिवस के अवसर पर बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता श्री कालीचरण रावत (सामाजिक कार्यकर्ता) ने स्वयं सेवियों को मानवीय मूल्यों के बारे में विस्तार से बताया। अपने सम्बोधन में मुख्य वक्ता द्वारा बताया गया कि अपने से बड़ों को आदर्श मानकर उनके बताए गए मार्ग पर चलना चाहिए, अपने देश की महान विभूतियों के द्वारा स्थापित जीवन मूल्यों को अपने जीवन मे उतारने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे हम अपने समाज के उत्थान में अपना सहयोग दे सकें। अनुशासन और नैतिक मूल्यों का जीवन में हर समय उपयोग होता है हमारा जीवन परोपकार के साथ मानवता की सेवा के लिए समर्पित हो यह भावना हम सभी के मन मे होनी आवश्यक है। इस शिविर से हमे समाज के लिए कुछ अलग करने की क्षमता का विकास होता है जीवन मे गुरु और शिष्य का रिश्ता पवित्र है अपने गुरुजनों का सम्मान सदैव मन से हो के लिए हमारे मन मे गुरु के लिए अलग स्थान होना आवश्यक है।

 तत्पश्चातअपने सम्बोधन में राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के अधिकारी श्री विनय सेमवाल ने स्वयं सेवकों को अनुशासन का जीवन मे क्या महत्व है पर विस्तृत रूप से बताया और अनुशासन को आत्मसाथ करने से जीवन में  सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा जा सकता है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी श्री विनय सेमवाल, सह प्रभारी आर आर बहुगुणा , श्री विजेंद्र भण्डारी  व श्री कालीचरण रावत उपस्थित थे।

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