30 हजार की रिश्वत ने अधिकारी को पहुंचाया हवालात।
उत्तराखण्ड विजिलेंस टीम के द्वारा मण्डी निरीक्षक को 30 हजार की घुस लेते रगें हाथ गिरप्तार किया गया। आरा मिल ओर लकड़ी मण्डी के व्यापारी से लाइसेंस को ट्रांसफर करने के नाम पर यह रकम घुस के रूप में ली गयी थी। विजिलेंस टीम ने छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज आरोपी के दफ्तर से बरामद किए हैं।
विजिलेंस की टीम द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है अभी हाल में ही रजिस्ट्रार कानूनगो के खिलाफ हुई छापेमारी की हलचल थमी नही थी कि मंडी निरीक्षक विजिलेंस के हत्थे चढ़ गया।
मंडी निरीक्षक के खिलाफ 29 नवम्बर को हेल्पलाइन नम्बर 1064 पर मिली शिकायत में आरा मिल ओर लकड़ी के थोक व्यापार का लाइसेंस अपने पुत्र के नाम ट्रांसफर करवाने के लिए मण्डी निरीक्षक शिवमूर्ति सिंह के पास जाने पर शिवमूर्ति सिंह द्वारा रिश्वत की मांग लाइसेंस ट्रांसफर के लिए की गई। यह मामला विजिलेंस के पास पहुंचा और विजिलेंस की ट्रेप टीम द्वारा बिछाए जाल में मण्डी निरीक्षक शिवमूर्ति सिंह फंस गया।
विचारणीय है कि क्या इसलिए ही उत्तराखण्ड बना था, क्या अधिकारियों के सम्पत्ति की जांच समय समय पर नही होनी चाहिए। राजनैतिक दलों ओर सत्ता रूढ़ दल क्यों इन मुददों पर चुप हैं। क्यों यह बात विधानसभा के पटल पर या किसी के मुहँ से आजतक ये बात नही निकली की आय और सम्पत्ति की जांच गोपनीय तरीके से चलती रहे जिससे बड़ी मछलियां भी पकड़ में आएगीं।


