2015 बैच के दरोगा विजिलेंस जांच के दायरे में।
विजिलेंस की रडार के डर से मचा है हड़कम्प, विजिलेंस ने मांगी जानकारी अब देखना यह है कितने दरोगा निकलते हैं फर्जी।
उत्तराखण्ड की भर्तियों पर धांधलियों का कितना गहरा प्रभाव था यह उत्तराखण्ड भर्तियों के घोटाले के कारण सुलगने की कगार पर था। मामले की गम्भीरता को देखते हुए सरकार को भी अपनी रणनीति इस तरह बनानी पड़ी की हर कोई इस मामले पर बयान न देकर प्रवक्ताओं को चयनित करके ही वही प्रवक्ता इस मामले पर बोल रहे थे जिनको नियुक्त किया गया था।
UKSSSC (उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) भर्ती घोटाले जांच की आंच 2015 में हुई दरोगा भर्ती पर भी पड़ी जिसपर विजिलेंस ने रिपोर्ट मांगी है। विजिलेंस द्वारा मांगी गई रिपोर्ट से हड़कम्प मचा हुआ है।
दरोगा भर्ती में धांधली का मामला जिसपर विजिलेंस की टीम ने उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों से सूची मांगी है। जनपदों में तैनात दरोगाओं के नाम पते आदि की जानकारी विजिलेंस के द्वारा मांगे गए हैं। अभीतक विजिलेंस द्वारा 8 अक्टूबर तक 12 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। इस मामले में पूछताछ जारी है।
2015 में हुई दरोगा भर्ती में धांधली की सुगबुहाट स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में हुई परीक्षा के पेपर लीक जांच के समय हुई। 15 दरोगाओं के द्वारा की गई भर्ती परीक्षा में पुख्ता सबूत जांच टीम के पास थे। अब यहां पर एसटीएफ भी पुलिस का हिस्सा होने के कारण यह जांच विजिलेंस से कराए जाने का निर्णय लिया गया क्योंकि भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच उत्तराखंड एसटीएफ कर रही थी। विजिलेंस को मामला मिलते ही 12 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ साथ छानबीन शुरू की गई। यह परीक्षा पंतनगर विश्वविद्यालय के द्वारा करवाई गयी थी इस परीक्षा में हुई धांधली के चलते पंतनगर विश्विद्यालय के एक वर्तमान व एक भूतपूर्व अधिकारी को भी नामजद आरोपी बनाया गया है।
धंधलीबाज दरोगा पर शक तब गहराया जब पता लगा कि इन दरोगाओं को केस डायरी लिखनी तक नही आ रही, आंशका है कि इनकी संख्या 100 तक हो सकती है।
शुरुआती पड़ताल में 12 दरोगाओं के खिलाफ एसटीएफ के पास पुख्ता सबूत थे पर धाँधलीबाजी में 35 के करीब की संख्या का अनुमान है।
इस पर विजिलेंस ने 2015 बेच के सभी दरोगाओं की पूरी जानकारी चाही है इनका विवरण मिलने पर इनसे पूछताछ के कार्यक्रम आगे किया जाएगा।
एसटीएफ को मिले सबूतों के साथ साथ विजिलेंस जांच में मिले सबूतों के आधार मिलान करके ही पूछताछ को किया जाएगा।
इस पर डीजीपी अशोक कुमार पहले ही कह चुकें हैं कि यदि इन दरोगाओं के खिलाफ कोई ठोस सबूत मिलता है तो इनपर उचित कार्यवाही की जाएगी।
मुकदमा दर्ज होने के बाद ओर उसके बाद विजिलेंस की जांच से कई दरोगाओं के हाथ पैर फूल रखें हैं। जांच का समय कितना होगा यह सब्र कितना कर पाएंगे तबतक हो सकता कोई सरकारी गवाह बन जाये देखना यह है कि कितने फर्जी निकलते हैं ओर इनके खिलाफ क्या कार्यवाही होती है।


