पौराणिक परम्पराओं की समृद्ध विरासत भव्य पांडव लीला का जखोली बड़मा गावँ में आयोजन।
पांडवों की कर्मस्थली उत्तराखण्ड के केदारखण्ड की लोकमान्यताओं और लोकजीवन में पाण्डव अभिन्न हिस्सा हैं।
उत्तराखंड की भूमि भगवान भोलेनाथ की तपस्थली के साथ पुराणों में वर्णित अनेकों देवऋषि, महर्षि और देवताओं की तपस्थली रही है, जो कि यहां कि लोक एवं पौराणिक परम्पराओं की समृद्ध विरासत को अपने अंदर समेटे हुए है। इसी विरासत में पाण्डवों का अभिन्न हिस्सा यहां कीलोक संस्कृति में रचा बसा है जिसका प्रमाण पुराणों में भी मिलता है क़ि पाण्डवों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा यहां पर रहकर मंदिरों के निर्माण से लेकर गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति के लिए केदारखण्ड का चुनाव करना यहां की महत्ता को प्रदर्शित करता है।
समय समय पर विभिन्न क्षेत्रों में अनेकानेक कार्यक्रमों के माध्यम से इस विरासत के दर्शन होते रहते हैं । पांडवों की कर्मस्थली होने के कारण उत्तराखंड के लोकमानस व परम्पराओं पर पांडवों की स्पष्ट छाप दृष्टिगोचर होती है। पांडव यंहा के कण कण में रचे बसे हैं। इसी कारण यंहा गांव गांव में पांडव लीलाओं के माध्यम से उस सम्बन्ध को याद किया जाता रहता है जोकि अब एक लोक परम्परा व संस्कृति का अभिन्न अंग बन गया है। जखोली बड़मा गांव में 20 नवम्बर से पांडव लीला का आयोजन इसी परम्परा को आगे बढ़ाने एवं आने वाली पीढीयों तक पंहुचाने के लिए किया जा रहा है।
पांडवों से सम्बन्धित अनेकों कलाओं का प्रदर्शन भी इन लीलाओं के माध्यम से किया जाता है इन्हीं में से एक कला या विधा व्यूह रचना की है | महाभारत से प्रेरित इस विधा में अनेक प्रकार के व्यूहों का निर्माण किया जाता है । जैसे चक्रव्यूह, कमलव्यूह, आदि । इसी क्रम में जखोली बड़मा गांव में 14 दिसम्बर को सर्वत्तोभद्र व्यूह एवं 15 दिसम्बर को मकर व्यूह का आयोजन किया जा रहा है।
संचार के साधन न होना और लोकपरम्परा की विधा का मौखिक होना जटिल समस्याएं होने के बाद भी लोकसंस्कृति को परम्परागत रूप से आज भी बिना किसी बदलाव के निर्वहन किया जा रहा जो कि सशक्त और लोकजीवन में रची बसी हुयी है और अपनी परम्पराओं के निर्वहन कर्तव्य मानने वाले आज अपना योगदान समाज में परम्पराओं को जीवित रखने में दे रहे हैं।
इस अवसर पर पाण्डव लीला आयोजन के अध्यक्ष श्री बलराम सिंह पंवार ग्राम प्रधान जखोली बड़मा, सरंक्षक- राम सिंह पंवार, भगवान सिंह पंवार, निर्देशक - कृपाल सिंह पंवार, रघुवीर सिंह, उपाध्यक्ष - पुष्कर सिंह, कोषध्यक्ष- सत्ये सिंह पंवार, जसपाल सिंह, सचिव - सुरेन्द्र सिंह पंवार, वीरबल सिंह नेगी सहित समस्त महिला मंगलदल सदस्य, नवयुवक मंगलदल सदस्य व समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहे।


