मानव और वन्य जीवों का सह-अस्तित्व ही जीवन का आधार

मानव और वन्य जीवों का सह-अस्तित्व,
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 मानव और वन्य जीवों का सह-अस्तित्व ही जीवन का आधार।

जाखणी जखोली रेंज कार्यालय में हुआ कार्यशाला का आयोजन।

रूद्रप्रयाग जनपद के रूद्रप्रयाग वन प्रभाग के अंतर्गत उत्तरी और दक्षिणी जखोली रेंज में 'वन्य जीवों संग सह-अस्तित्व' विषय पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मानव-वन्य जीव संघर्ष को कम करना और पारिस्थितिकी तंत्र में वन्य जीवों की महत्ता के प्रति लोगों को जागरूक करना था।

 कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित 'तितली ट्रस्ट' के वन्य जीव विशेषज्ञ राजेश भट्ट ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वनों और वन्य जीवों का चोली-दामन का साथ है; जीवों के बिना वन और वनों के बिना मानव जीवन की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के समय में वन्य जीवों के साथ सामंजस्य बिठाकर 'सह-अस्तित्व' (Co-existence) की राह पर चलना ही एकमात्र विकल्प है।

गुलदार और बाघों से जुड़ी भ्रांतियों पर प्रहार प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ ने पहाड़ों में वन्य जीवों को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अक्सर यह गलत धारणा होती है कि गुलदार या बाघ शिकार का खून पीते हैं। हकीकत में, गुलदार गले के हिस्से पर और बाघ गर्दन की स्पाइनल हड्डी पर वार कर उसे तोड़ देता है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी इंसान पर एक बार हमला करने से कोई जानवर आदमखोर नहीं हो जाता। वन्य जीव आमतौर पर इंसानों पर सीधे हमला नहीं करते, वे केवल तभी आक्रामक होते हैं जब उन्हें सामने वाला अपने आकार से छोटा लगे या वे खुद को असुरक्षित महसूस करें।

 कार्यशाला में वन विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ H.N.B गढ़वाल विश्वविद्यालय के वानिकी (Forestry) के छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया। छात्रों ने वन्य जीवों के व्यवहार को लेकर कई सवाल पूछे, जिससे सत्र काफी संवादात्मक रहा। इस मौके पर विभिन्न वन पंचायतों के सरपंच भूपेन्द्र कुमार, सतीश रतूड़ी, जयकृष्ण नौटियाल, भगवान सिंह और लक्ष्मण सिंह ने वन विभाग के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाओं से आम जनता का जुड़ाव वन्य जीवों के प्रति बढ़ेगा और संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कर्मचारियों को वन्य जीवों के व्यवहार की बारीक जानकारी देने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे।


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