लापरवाही की भेंट चढ़ी जिंदगी: गड्डा-मुक्त के नाम पर बिछाई गई 'मौत की मिट्टी', बुजुर्ग की जान गई।
प्रदेश में सड़कों को 'गड्डा-मुक्त' करने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत आज एक बार फिर विकासखंड जखोली के अंतर्गत कोटी-घण्डियाली मोटरमार्ग पर पोड़ानामी तोक में लहूलुहान होकर सामने आई।
जखोली (रुद्रप्रयाग): प्रदेश में सड़कों को 'गड्डा-मुक्त' करने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत आज एक बार फिर लहूलुहान होकर सामने आई। विकासखंड जखोली के अंतर्गत आज सुबह कोटी-घण्डियाली मोटरमार्ग पर पोड़ानामी तोक के पास विभाग की घोर लापरवाही के कारण सेमकोटी निवासी 69 वर्षीय उदय सिंह पुत्र श्याम सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विभाग द्वारा गड्ढे भरने के लिए सड़क पर डाली गई चिकनी मिट्टी ने इस मार्ग को 'स्लिप जोन' में तब्दील कर दिया है, जिसके चलते यह हादसा हुआ।
हैरानी की बात यह है कि दुर्घटना ढलान पर नहीं, बल्कि चढ़ाई चढ़ते वक्त हुई। मृतक उदय सिंह अपनी स्कूटी से सेमकोटी से जखोली की ओर जा रहे थे। आमतौर पर ढलान पर गति तेज होने से फिसलन का डर रहता है, लेकिन यहाँ विभाग द्वारा डाली गई दिग्धार तोक की चिकनी मिट्टी इतनी खतरनाक थी कि चढ़ाई चढ़ते वक्त भी स्कूटी अनियंत्रित होकर फिसल गई। चश्मदीदों का कहना है कि उदय सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
इस घटना ने स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आक्रोश को भड़का दिया है। समाजसेवी जय ओमप्रकाश ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
"गड्डा-मुक्त सड़क के नाम पर सिर्फ बजट को ठिकाने लगाने का काम किया जा रहा है। हकीकत यह है कि जहाँ गड्ढे नहीं थे, वहाँ भी गड्ढे बन गए इससे दुर्घटना के खतरे अधिक पैदा कर दिए गए हैं। विभाग ने बजट की कमी का रोना रोते हुए डामर के बजाय चिकनी मिट्टी से गड्ढे भर दिए और कोई देखरेख करने वाला नहीं है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक हत्या है ।"
ग्रामीण लिंक मार्गों की दुर्दशा का एक बड़ा कारण सड़कों पर 'बेलदारों' (Road Maintenance Workers) का न होना है। पहले हर सड़क की देखरेख के लिए बेलदार नियुक्त होते थे, जो छोटे-मोटे गड्ढों और नालियों की सफाई तुरंत करते थे। अब आउटसोर्स बेलदारों को भी हटा दिया गया है। विभाग हर छोटे काम को ठेके पर दे रहा है, जिससे न तो काम की गुणवत्ता बनी रहती है और न ही समय पर मरम्मत होती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि बेलदारों की स्थाई भर्ती की जाए, तो युवाओं को रोजगार मिलेगा और सड़कों का रखरखाव भी 24 घंटे सुनिश्चित हो सकेगा।
हादसे के कई घंटों बाद भी विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या सड़क से मिट्टी हटाने का काम शुरू नहीं किया गया था। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और सड़कों की हालत नहीं सुधारी गई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस मौत की जिम्मेदारी लेगा या हमेशा की तरह इसे महज एक 'दुर्घटना' बताकर रफा-दफा कर दिया जाएगा?
मयाली-गुप्तकाशी क्षेत्रीय विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष डाक्टर नरबीर सिंह रौथाण व सह सचिव जयओमप्रकाश ने कहा कि यदि उचित मुआवजा व सड़क पर डीपीआर के तहत कार्य नहीं करवाया गया तो उग्र आन्दोलन किया जाएगा।


