15 वर्षों बाद निकली माँ काली की भव्य देवरा यात्रा पहुंची भीरी; केदारघाटी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब।
माँ काली की यह प्रथम चरण की देवरा यात्रा पूरे 15 वर्षों के अंतराल के बाद गत 7 दिसंबर को कालीमठ से शुरू हुई थी।
ऊखीमठ: केदारघाटी की आराध्य देवी, सिद्धपीठ कालीमठ की माँ काली की देवरा यात्रा अपने प्रथम चरण के अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर देवप्रयाग में गंगा स्नान करने के पश्चात, लगभग डेढ़ माह के सफर के बाद यह डोली केदारघाटी के भीरी पहुँच गई है। भीरी पहुँचने पर स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और ढोल-दमाऊ की थाप के साथ डोली का भव्य स्वागत किया। आज यह यात्रा भैंसारी गांव के लिए प्रस्थान करेगी।
15 साल का लंबा इंतजार और आस्था का सफर उल्लेखनीय है कि माँ काली की यह प्रथम चरण की देवरा यात्रा पूरे 15 वर्षों के अंतराल के बाद गत 7 दिसंबर को कालीमठ से शुरू हुई थी। कालीमठ घाटी का भ्रमण करने के बाद, माता की डोली भक्तों को आशीर्वाद देते हुए सिद्धपीठ धारी देवी पहुंची। वहां से श्रीनगर होते हुए यात्रा संगम स्थल देवप्रयाग पहुंची, जहाँ पवित्र स्नान के बाद अब पुनः पैदल मार्ग से केदारघाटी में प्रवेश कर चुकी है।
जनवरी के अंत में होगी मूल स्थान पर वापसी देवरा यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत सिंह राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा में प्रतिदिन लगभग 90 यात्री पैदल चल रहे हैं। यात्रा का संचालन मंदिर समिति और कालीमठ घाटी की पंचगाई (कालीमठ, ब्यूंखी, कविल्ठा, जग्गी बगवान, बेडुला) एवं कुणजेठी गांव के ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जनवरी के अंतिम सप्ताह में माँ काली अपने मूल स्थान कालीमठ में पुनः विराजमान हो जाएंगी।
द्वितीय चरण में केदारनाथ धाम जाएगी यात्रा प्रबन्धक प्रकाश पुरोहित ने भविष्य की योजना साझा करते हुए बताया कि इसी वर्ष जुलाई-अगस्त माह में देवरा यात्रा का द्वितीय चरण शुरू होगा, जिसके अंतर्गत माँ काली की डोली भगवान केदारनाथ के धाम जाएगी।
इस अवसर पर यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत सिंह राणा, महामंत्री सुरेशानन्द गौड़, उपाध्यक्ष सुदर्शन राणा, कोषाध्यक्ष पुष्कर सिंह, प्रधान प्रदीप राणा, प्रबन्धक प्रकाश पुरोहित, राकेश राणा, दिनेश गौड़, मोहन सिंह और यशवंत सिंह राणा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


